एक हिंदू बुढ़िया मज़ार पर पहुँची रो रोकर…
एक हिंदू बुढ़िया श्रद्धा और आस्था की गठरी लेकर मज़ार पर पहुँची, अपने मन में आशा और भावनाएँ संजोए। रो-रोकर वह अपने प्रार्थना कर रही थी, जैसे कोई अंतिम उम्मीद हो। अचानक, वहां का माहौल बदल गया और सबकी आँखें आश्चर्यचकित रह गईं। उस पल ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया कि भरोसा और श्रद्धा कितनी शक्तिशाली हो सकती है।