भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों
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श्रेय:
संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल
लेखक - याचना अवस्थी
भक्तों.. हमारे यात्रा कार्यक्रम दर्शन में आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन...हमारे भारत देश में कई ऐसे राज्य हैं, ऐसे शहर हैं जो अपनी किसी न किसी विशेषता के कारण हमेशा हमारे बीच चर्चा का विषय रहे हैं.. उन्ही में से एक है मध्य प्रदेश राज्य का एक पुरातन नगर खंडवा .. जो मान्यता अनुसार हजारों वर्ष पुराना है इसका प्राचीन नाम खांडववन था फिर मुगलों और अंग्रेजों के बोलचाल में आने के बाद इसका नाम खंडवा हो गया... इस नगर की प्राचीनता यहाँ पाए जाने वाले अवशेषों से सिद्ध होती है..प्राचीन होने के साथ साथ खंडवा एक धार्मिक स्थल के रूप में भी प्रमुख नगर है... भगवान् शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग खंडवा में स्थित होने की वजह से यह एक पवित्र स्थल की श्रेणी में भी आ जाता है.. वो ज्योतिर्लिंग है “ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग”... और यह मंदिर ओम्कारेश्वर महादेव मंदिर के रूप में जाना जाता है..
मंदिर के बारे में:
नर्मदा नदी के बीच, हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना मन्धाता अथवा शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित ओमकारेश्वर मंदिर भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है. एवं यह मंदिर जिस पर्वत पर स्थित है उसे ओंकार पर्वत भी कहते है.. मान्यता है,, ॐ में बने चन्द्र बिंदु का जो स्थान है वही स्थान ओंकार पर्वत पर स्थित ओमकारेश्वर मंदिर का है.. यहाँ स्थित शिवलिंग स्वयंभू है तथा ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ ही यहाँ ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है I इन दोनों शिवलिंगों की गणना एक ही ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है... ओम्कारेश्वर मंदिर नर्मदा नदी के बीच स्थित होने के कारण, भक्तों को नाव द्वारा नदी को पार करके मन्धाता द्वीप पहुंचना होता है फिर वहां बने पक्के घाट जिसे कोटितीर्थ या चक्रतीर्थ भी कहते हैं भक्त यहाँ स्नान करने के बाद पास ही बनी सीढ़ियों से चढ़कर मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं..मंदिर तट पर ही कुछ उंचाई पर है.. इसके अतिरिक्त नर्मदा नदी के एक पार स्थित बस्ती विष्णुपुरी को दूसरे पार स्थित ओम्कारेश्वर मंदिर से जोड़ने वाला यहाँ एक बहुत बड़ा पुल भी है जो भक्त नाव द्वारा नर्मदा नदी पार नहीं करना चाहते, वो इस पुल के माध्यम से नदी पार करके ओम्कारेश्वर मंदिर पहुँच सकते हैं... मंदिर परिसर की सीढ़ियों पर ही संकरी सी मार्केट है जहाँ पूजा सामग्री, धार्मिक किताबें, लॉकेट, चूड़ी एवं भोग प्रसाद के साथ साथ अन्य दुकाने भी स्थित है.. यात्री इसी मार्केट से होते हुए मंदिर तक पहुँचते हैं...
मंदिर परिसर:
ओम्कारेश्वर मंदिर पांच खंडो में विभाजित है ...हर एक खण्ड पर अलग अलग देवताओं का स्थान है.. अतः मंदिर में कतारों के रूप में आगे बढ़ना होता है ...कतारों में आगे बढ़ते श्रद्धालुओं के मुख से बम बम भोले का जयघोष यहाँ के वातावरण को और भी सुरम्य बना देता है.. मंदिर में प्रवेश करते ही पंचमुख गणेशजी की मूर्ति है। प्रथम खंड में ओंकारेश्वर शिवलिंग विराजमान हैं। तथा शिवलिंग के समीप ही नंदी जी की मूर्ती है इस नंदी मूर्ती के हनु के नीचे एक स्तम्भ दिखाई देता है। ऐसा स्तम्भ नन्दी की अन्य मूर्तियों में विरल ही पाया जाता है। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के सामने ही राजा मान्धाता की गद्दी बनायी गयी है...यहाँ से आगे बढ़ने पर ओंकार पार्वतीश्वर महादेव विराजते हैं.. जहाँ पति पत्नी के जोड़े के रूप में पूजा करने की परम्परा है... मन्दिर में ही एक ओर बनी सीढ़ियाँ चढ़कर मंदिर के दूसरे खंड में जाने पर महाकालेश्वर शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यह शिवलिंग शिखर के नीचे है। महाकालेश्वर शिवलिंग के ऊपर छत समतल न होकर शंक्वाकार है यहाँ भी शिवलिंग के समीप ही नंदी जी स्थापित है जिनके कानों में भक्त अपनी मनोकामनाए बोलते हैं.. इस खंड में एक और भगवान् शिव के चिन्ह के रूप में एक बहुत ही अद्भुद त्रिशूल स्थापित है भक्त यहाँ तस्वीरे खींचते हैं तथा यहाँ से मंदिर की नक्काशी के साथ साथ बाहर ओंकारेश्वर क्षेत्र का मनमोहक नज़ारा देखते हैं..... मंदिर के तीसरे खंड में सिद्धनाथ शिवलिंग स्थित है। यह भी शिखर के नीचे है। पर इस खंड के प्रांगण में नन्दी जी की मूर्ति नहीं है। यह प्रांगण केवल खुली छत के रूप में है। चौथे खंड पर गुप्तेश्वर शिवलिंग और मंदिर के पांचवे खंड में ध्वजेश्वर शिवलिंग विराजमान है। ओंकारेश्वर मंदिर के चौथे एवं पांचवे खंडो के प्रांगण नहीं हैं। ये केवल ओंकारेश्वर मन्दिर के शिखर में ही समाहित हैं। तीसरी, चौथी व पांचवीं मंजिलों पर स्थित लिंगों के ऊपर स्थित छतों पर अष्टभुजाकार आकृतियां बनी हैं जो एक दूसरे में गुंथी हुई प्रतीत होती हैं। मंदिर के सबसे ऊँचे शिखर पर भोलेनाथ का त्रिशूल और डमरू लगा हुआ है..तथा यहाँ से नर्मदा नदी एवं अन्य घाटों का दृश्य देखने में बड़ा ही मनोरम लगता है..
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! ????
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। ????
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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