श्री मन: कामेश्वर नाथ मंदिर
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श्रेय:
संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल
लेखक - रमन द्विवेदी
भक्तों नमस्कार! प्रणाम! और हार्दिक अभिनन्दन! भक्तों आज हम आपको अपने लोकप्रिय कार्यक्रम दर्शन के माध्यम से जिस मंदिर की यात्रा करवाने जा रहे हैं, जिसमें प्रतिष्ठित शिवलिंग की स्थापना भगवान् भोलेनाथ शिव ने स्वयं की थी। भक्तों हम बात कर रहे हैं मनकामेश्वर मंदिर आगरा की!
मंदिर के बारे में:
भक्तों मनकामेश्वर मंदिर ताजनगरी आगरा स्थित एक सुप्रसिद्ध मंदिर है। जो भगवान शिव को समर्पित कई प्राचीन और प्रख्यात मंदिरों में से एक है। यह मंदिर आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन के समीप रावतपारा बाज़ार में स्थित है। जहाँ की गलियां अत्यंत संकीर्ण हैं। माना जाता है कि इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग भगवान् शिव ने द्वापर युग में, स्वयं कैलाश पर्वत से आकर स्थापित किया था। लोगों का विश्वास है कि यमुना नदी के पास स्थित श्मशान घाट में आज भी भगवान् शिव ध्यान करते हैं और रात रुकते हैं। यहाँ प्रतिष्ठित मुख्य शिवलिंग चांदी की परत से ढका हुआ है।
आगरा का परिचय:
भक्तों महाभारत में वर्णित एक कथा के अनुसार– आगरा प्राचीनतम नाम अग्रवन था। यहाँ सप्तर्षियों में शामिल प्रमुख ऋषि, महर्षि अंगिरा ने यहीं तपस्या की थी। उन्होंने तपोबल से उन्होंने अग्रवन में अपने नाम पर एक नगर बसाया जिसका नाम आंगिरा दिया। पहली ईस्वी सदी के ९वे दशक में क्लाडियस टॉलमी नाम क एक इजिप्तियन गणितज्ञ आया। जो आंगिरा का उच्चारण आंगरा किया करता था। कालांतर आंगरा का अपभ्रंश आगरा हो गया। ईस्वी सन 1526 से 1658 तक आगरा मुगल साम्राज्य की राजधानी के रूप में भी रहा। आज ताजमहल के कारण आगरा आज विश्व में विख्यात है।
पौराणिक कथा:
भक्तों आगरा स्थित मनकामेश्वर महादेव के सम्बन्ध एक पौराणिक कथा है जिस के अनुसार- द्वापर युग में भगवान् श्रीकृष्ण मथुरा में जन्म लेकर गोकुल में नन्द - यशोदा के पास पहुंचे तो भगवान् शिव को उनके बाल-रूप के दर्शन की कामना हुई। भगवान शिव कैलाश पर्वत से आकर यहाँ एक रात्रि व्यतीत की। और साधना करते हुए उन्होंने यह प्रण किया कि “यदि वह भगवान् बालकृष्ण को अपनी गोद में खिला पाए तो इस स्थान पर शिवलिंग के रूप में वो स्वयं विराजमान रहेगें”। जब भगवान शिव बालकृष्ण के दर्शन हेतु गोकुल स्थित नन्द भवन पहुंचे और यशोदा मैया से बालकृष्ण का दर्शन कराने का आग्रह करने तो यशोदा मैया उनके विकराल रूप को देख डर गई। उन्होंने भगवान् शिव को बालकृष्ण का दर्शन कराने से मना कर दिया। तब भगवान शिव वहीं एक बरगद के पेड़ के नीचे ध्यान लगा कर बैठ गये। तब भगवान श्री कृष्ण ने लीला शुरू कर दी और रोते-रोते शिव की तरफ इशारा करने लगे। तब यशोदा मैयाने शिव को बुला कर, बालकृष्ण को उनकी गोद में दिया और तब जाकर कृष्ण चुप हुए। बालकृष्ण का दर्शन करने के पश्चात् भगवान् शिव वापस यहाँ पहुंचे तथा अपनी प्रतिज्ञा अनुसार यहीं शिवलिंग में रूप में प्रतिष्ठित हो गए।
मनकामेश्वर नाम का रहस्य:
भक्तों आगरा स्थित मनकामेश्वर मंदिर के नाम के रहस्य के बारे में कहा जाता है कि भगवान् शिव बालकृष्ण के दर्शन की मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात यहाँ रहने की प्रतिज्ञा की थी। प्रतिज्ञा के बाद भगवान् श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन की मनोकामना पूर्ण हो गयी। मनोकामना पूर्ण होने के बाद से भगवान् शिव शिवलिंग के रूप में यहाँ रहते हैं। मान्यता है कि जिस प्रकार यहां भगवान् शिव के मन की कामना पूर्ण हुई, उसी प्रकार सच्चे मन से यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। इसीलिए यहाँ विराजमान शिवलिंग का नाम मनकामेश्वर पड़ गया।
शिवलिंग को हटाने का प्रयास:
भक्तों कहा जाता है कि 650 साल पहले महंत गणेश पुरी जी मनकामेश्वर शिवलिंग को दूसरी जगह स्थापित करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उत्तर व दक्षिण भारत की मिश्रित शैली में एक मंदिर का निर्माण भी करवाया किन्तु जब शिवलिंग को दूसरे मंदिर में प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से उठाया जाने लगा, तो वह हिला ही नहीं। कहा जाता है कि शिवलिंग को जितना ही उठाने की कोशिश की जाती उतना ही वो नीछे धसता जाता। यही वजह है कि मनकामेश्वर महादेव का दर्शन करने के लिए भक्तों को सीढ़ियों से नीचे उतरना पड़ता है।
मंदिर परिसर:
भक्तों आगरा के मनकामेश्वर मंदिर परिसर में, मनकामेश्वर महादेव के अलावा सिद्धेश्वर महादेव और ऋणमुक्तेश्वर महादेव आदि शिवलिंग स्वरुप में विराजमान हैं। इस मंदिर परिसर में श्री राधा रासबिहारी जी, भगवान् नरसिंह, धर्मराज, कालभैरव, यक्ष, किन्नर की मूर्तियों के साथ साथ संकटमोचन हनुमान जी की दक्षिणमुखी मूर्ति भी विराजमान है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों का दर्शन:
भक्तों आगरा के मनकामेश्वर मंदिर में आपको मनकामेश्वर महादेव के साथ साथ द्वादश ज्योर्लिंगों के दर्शन हो जाते हैं क्योंकि इस मंदिर की दीवारों पर द्वादश ज्योर्लिंगों प्रतिकृतियों की स्थापना की गयी है।
भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! ????
इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। ????
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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