श्री ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन

Tilak
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#tilak #shiv #darshan श्रेय: संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल लेखक - याचना अवस्थी भक्तों आप सभी का हमारे यात्रा कार्यक्रम दर्शन में प्रणाम एवं हार्दिक अभिनन्दन..हमारा भारत देश अपनी संस्कृति, विभिन्न प्रकार के रीति रिवाजों, त्योहारों, तथा यहाँ के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों की वजह से पूरे विश्व में सर्वोपरि रहा है.. यहाँ के धार्मिक एवं पौराणिक स्थलों के दर्शन करने सिर्फ भारत से ही नहीं अपितु पूरे विश्व के कोने – कोने से लोग यहाँ आते हैं.. और आज हम आपको एक ऐसे ही सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल की यात्रा करवाने जा रहे हैं... जिसको भगवान् भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग की मान्यता प्राप्त है और वो ज्योतिर्लिंग है मध्य प्रदेश राज्य के खंडवा शहर के समीप ओंकारेश्वर क्षेत्र में स्थित “ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग”.... मंदिर के बारे में: भोलेनाथ के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग जिसको अमरेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहते हैं, मध्य प्रदेश के खंडवा शहर के ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के दक्षिण तट पर स्थित है। यह मंदिर ओमकारेश्वर मंदिर से करीब 1 किमी की दूरी पर है। या यूँ कहे तो नर्मदा नदी के कल कल करते जल के बीच एक छोर पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तो दुसरे छोर पर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग है.. अलग अलग होते हुए भी दोनों की गणना एक ही शिवलिंग, एक ही ज्योतिलिंग के रूप में की जाती है.. .. विष्णुपुरी के पास स्थित गोमुख से बराबर जल गिरता रहता है। यह जल नर्मदा में जहाँ गिरता है, उसे कपिला-संगम तीर्थ कहते हैं। वहाँ स्नान और मार्जन किया जाता है। ममलेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा नदी के किनारे स्थित होने के कारण, भक्तों को नाव या वहीँ पर बने सेतु द्वारा नदी को पार करके मममलेश्वर ज्योतिर्लिंग पहुंचना होता है मंदिर उंचाई पर होने के कारण घाट के पास से ही मंदिर की ओर जाती हुई सीढियां चढ़कर भक्तगण मंदिर की ओर दर्शन के लिए जाते हैं....रास्ते में बहोत सी खाने पीने की दुकाने भी पड़ती हैं.. जैसे जैसे आगे भड़ते हैं तो मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर भगवान को अर्पित किए जाने वाले बिल्व पत्र, फूल, फल और प्रशाद के पैकेट, खिलौनों, सिन्दूर, धार्मिक पुस्तकों, लाकेट, की बहुत सी दुकाने मिलती है। जहाँ से भक्त भोग प्रसाद खरीद कर भोलेनाथ का दर्शन पूजन कर सकते हैं... मंदिर प्रांगण के मुख्य द्वार से प्रवेश करके परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु मंदिर में जाते हैं...मंदिर के पास ही कुछ ब्राहमणों द्वारा पार्धिव शिव लिंग की पूजा की जाती हैं। यह पूजा 1000 शिव लिंगों की पूजा के बराबर मानी जाती है। ममलेश्वर मंदिर भी ओंकारेश्वर मंदिर की तरह पांच खण्डों में विभाजित है.. हर खण्ड में भगवान् भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजते हैं... कुछ दर्शनार्थी पहले ममलेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं फिर ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं... जबकि नियमानुसार ओम्कारेश्वर महादेव के दर्शन के बाद ही ममलेश्वर महादेव के दर्शन करने चाहिए.. मंदिर परिसर: भक्तों,, ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के मंदिर परिसर की बात करे तो यह मंदिर पूर्णतः पत्थर से बना हुआ है। जो कि दिखने में काफी आकर्षक है.. बड़े - बड़े पत्थरों के ऊपर की गयी खूबसूरत नक्काशी एवं दीवारों पर लिखे 11वीं शताब्दी के शिवमहिमा स्त्रोतम को देख भक्त मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। परिसर की दीवारों पर पत्थर की मूर्तियाँ उकेरी गयीं है,, जो दिखने में एकदम जीवंत लगती है.. मंदिर परिसर में भगवान् भोलेनाथ के पत्थर से बने हुए और भी छोटे बड़े मंदिर स्थित हैं इन मंदिरों में वृद्ध्कालेश्वर, बाणेश्वर, मुक्तेश्वर, कर्दमेश्वर, तिलभांडेश्वर नामक भोलेनाथ के स्वरुप स्थित हैं.. एक दो मंदिरों के अलावा बाकी मंदिरों में जाने की अनुमति नहीं हैं.. ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का यह मंदिर अब पुरातत्व विभाग की देख रेख में आता है .. मंदिर के गर्भग्रह की ओर जाने के लिए एक विशाल प्राचीन बरामदे से गुज़ारना होता है जिसमे बहुत से स्तम्भ लगे हुए हैं..भक्तों के द्वारा होने वाला बम बम भोले के जयघोष से मंदिर का कण कण गूँज उठता है ...मंदिर के शिखर पर हवा में लहराता खूबसूरत ध्वज को देख भक्तों को अद्भुद शान्ति का अनुभव होता है .. मंदिर का गर्भग्रह: ममलेश्वर मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों की भारी भीड़ पंक्तियों के रूप में गर्भ ग्रह की और बढती है गर्भग्रह का द्वार बहोत छोटा है अतः गर्भग्रह के बीच में भगवान् भोलेनाथ शिवलिंग रूप में विराजमान है, जिन्हें ममलेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। यहीं शिवलिंग के पास ही पीछे की ओर माता पार्वती विराजती हैं.. और वहीँ पर नीचे की और दीवार में नाग देवता का रूप भी विराजमान है.. भक्तगण भोलेनाथ का अभिषेक कर महादेव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.. वहीँ शिवलिंग के सामने पंक्तियों के दूसरी तरफ नंदी जी की मूर्ती विराजमान है.. भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! ???? इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। ???? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #temple #hinduism #mamleshwarjyotirlingamandir #mahadev #shiv #travel #darshan #tilak #yatra #vlogs #madhyapradesh

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