समाधीश्वर मंदिर की अद्भुत मूर्ती में एक साथ दिखते हैं

Tilak
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#darshan #travel #mahadev Credits: tilak Youtube Chanel संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल लेखक - रमन द्विवेदी भक्तों नमस्कार! प्रणाम! और हार्दिक अभिनन्दन... भक्तों आज हम आपको अपने यात्रा कार्यक्रम “दर्शन” के माध्यम से जिस अद्भुत शिव मंदिर का दर्शन करवाने जा रहे हैं, वो है चित्तौड़गढ़ का समाधीश्वर मंदिर.... मंदिर के बारे में: भक्तों विश्व विख्यात चित्तौड़ दुर्ग का हर एक भवन ऐतिहासिक है। इनमें एक हजार साल पुराना एक शिव मंदिर भी है। जिन्हे समाधीश्वर अर्थात समाधि के देवता कहा जाता है। इस मंदिर को देखने के लिए देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं। इस मंदिर की खास बात यह है, कि यहां अकेले शिव नहीं अपितु शिव जी के साथ ब्रह्मा और विष्णु के त्रिमूर्ति दर्शन होते हैं। इन तीनों ही देवताओं की मूर्तियाँ एक ही पत्थर पर विराजमान हैं। जिनकी पूजा के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं। और इस मंदिर में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश का त्रिमूर्ति दर्शन कर अभिभूत हो जाते हैं। इतिहास: भक्तों समाधीश्वर मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में परमार राजा भोज द्वारा किया गया था। और 13वीं और 15वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण किया गया था। वर्तमान समय में, मंदिर में प्रतिष्ठित मूर्ति को ""अदभुत-जी"" या ""अदबद-जी"" के रूप में जाना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार: भक्तों इस प्राचीन मंदिर के पास मौजूद ऐतिहासिक शिलालेख के आधार पर मंदिर को बनाते समय राजा भोज ने पहली बार वास्तुशास्त्र का उपयोग किया। निर्माण से पहले सैकड़ों ज्योतिष और पंडितों को बुलाकर कुंडली बनवाई। तत्पश्चात शिल्पकारों से वास्तुशास्त्र को ध्यान में रखते हुये इसका निर्माण करवाया, ताकि भविष्य में इस मंदिर को कोई नुकसान न पहुंचे। मंदिर की विशेषताएँ: भक्तों समाधीश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि मूर्तिकार ने एक ही पत्थर पर सृष्टि के निर्माता ब्रह्माजी, पालक विष्णुजी और विनाशक महेशजी (शिवजी)की मूर्तियाँ बनाई लेकिन एक बारगी देखकर पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौनसी मूर्ति किसकी है? इसमें भगवान के बचपन, जवानी और बुढ़ापे की प्रतिमाएं हैं। बचपन का रूप ब्रह्मा का, जवानी का भगवान विष्णु का और बुढ़ापे का भगवान शिव का है। इन प्रतिमाओं को इनकी विशेषताओं से पहचाना जाता है। मूर्तियों की पहचान: भक्तों समाधीश्वर मंदिर में प्रतिष्ठित मूर्तियों में मूर्तिकार ने अलग-अलग पहचान डाली है। जैसे ब्रह्माजी के एक हाथ में कमल का फूल और दूसरे हाथ में शंख, भगवान विष्णुजी के सिर पर त्रिपुंड और कान में कुंडल और अंत में भगवान शिव की मूर्ति है, जिसके हाथ में खप्पर तथा गले में नाग है। मूर्ति स्थापना पहले मंदिर बाद में: भक्तों यह पूरे विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें मूर्ति पहले प्रतिष्ठित की गयी और मंदिर का निर्माण बाद में हुआ। इसका प्रमुख कारण यह है, कि इस मंदिर में प्रतिष्ठित ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तीन मूर्तियां 7 फीट के एक विशाल शिलाखंड पर उत्कीर्ण हैं। मंदिर बन जाने के बाद इतनी विशाल मूर्तियों को मंदिर के अंदर प्रतिष्ठित करना संभव नहीं था। इसलिए मूर्तियां प्रतिष्ठित पहले की गईं और मंदिर बाद में बनाया गया। मंदिर विध्वंश: भक्तों विक्रम संवत 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया। इस आक्रमण में उसने न केवल समाधीश्वर मंदिर की बहुत सी मूर्तियों को तोड़ा अपितु उद्दंडतापूर्वक मंदिर का विध्वंश भी किया। यद्यपि हमले से बचाने के लिए आधे मन्दिर को मिट्टी में ढंक दिया गया था। इसलिए मंदिर में प्रतिष्ठित असली मूर्तियां बच गईं। जीर्णोद्धार: भक्तों समाधीश्वर मंदिर में लगे दो शिलालेखों के आधार पर खिलजी के विध्वंश के बाद समाधीश्वर मंदिर का दो बार जीर्णोद्धार कराया गया। जो क्रमशः पिता पुत्र महाराणा मोकल और महाराणा कुम्भा ने कराया। वास्तुकला: भक्तों इस मंदिर के निर्माण में वास्तुकला का बहुत ध्यान रखा गया है। मंदिर और मंदिर का प्रवेशद्वार की नींव कमल के फूल की आकृति और ऊपर कीचक हैं। मंदिर के अंदर और बाहर आते जाते समय कीचक पर पैर रखकर आना जाना पड़ता है, मान्यता है कि ऐसा करने से संबन्धित व्यक्ति सभी दोष दूर हो जाते हैं। ये मंदिर एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है, जिसमें प्रतिष्ठित नंदी की आंखे सीधे प्रतिमाओं से मिलती हैं। नजदीकी दर्शनीय स्थल: भक्तों यदि आप राजस्थान के प्रमुख पर्यटक स्थल चितौड़गढ़ में समाधीश्वर मंदिर घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो चितौड़गढ़ में मीरा बाई मंदिर के अलावा चित्तौड़गढ़ दुर्ग, विजय स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, महासती, गौमुख कुंड, राणा कुंभा का महल, कालिका माता मंदिर, फतेह प्रकाश पैलेस, श्यामा मंदिर, सतीश देओरी मंदिर, सांवरियाजी मंदिर, मेनाल शिव मंदिर, रतन सिंह पैलेस, भैंसरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, बस्सी वन्यजीव अभयारण्य और पद्मिनी पैलेस आदि दर्शनीय स्थलों की अपनी मीरा बाई मंदिर यात्रा के दौरान कर सकते हैं। भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! ???? इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। ???? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #hinduism #samadhiswaratemple #mahadev #temple #rajasthan #travel #vlogs #darshan

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