जटोली शिव मंदिर

Tilak
2 Views
#shiv #devotional #hinduism Credits: tilak Youtube Chanel श्रेय: संगीत एवम रिकॉर्डिंग - सूर्य राजकमल लेखक - रमन द्विवेदी भक्तों! सादर नमन, वंदन और अभिनन्दन… भक्तों! देवभूमि हिमाचल में वैसे तो सभी देवी- देवताओं के नाम से कई धार्मिक स्थल हैं, कई प्रसिद्ध तीर्थ हैं, कई पवित्र धाम हैं और आध्यात्मिक मंदिर हैं। किन्तु इनमें से अधिकांश मंदिर माँ जगदंबा और भगवान शिव को समर्पित हैं। हिमाचल प्रदेश स्थित सभी शिव मंदिरों की अपनी अपनी विशेषता है, अपनी अपनी गाथा है और अपना-अपना महत्व है। ऐसा ही एक मंदिर है देवभूमि हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन स्थित जटोली शिव मंदिर.. मंदिर के बारे में: भक्तों जटोली शिव मंदिर हिमांचल प्रदेश के सोलन शहर से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यह एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। कहा जाता है कि दक्षिण-द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर को बनने में करीब 39 साल का समय लगा था। मंदिर का इतिहास: भक्तों हिमांचल प्रदेश के जिला सोलन की खूबसूरत और हसीन वादियों स्थित जटोली शिव मंदिर की आधारशिला स्वामी श्री कृष्णानंद परमहंस महाराज जी ने रखी थी। कहा जाता है कि स्वामी कृष्णानंद परमहंस 1950 में जटोली पधारे और यहीं रहकर साधना करने लगे। वर्ष 1973 में स्वामी श्री कृष्णानंद परमहंस महाराज जी ने जटोली शिव मंदिर की स्थापना की और 1974 में मंदिर के निर्माण कार्य में तीव्रता आई। जटोली शिव मंदिर की भव्यता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसके निर्माण में लगभग चार दशक अर्थात 39 वर्ष का समय लगा। सबसे ऊंचा शिव मंदिर: भक्तों वर्ष 1983 में स्वामी कृष्णानंद के ब्रह्मलीन होने के बाद मंदिर प्रबंधन कमेटी ने इस मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण किया। 122 फीट ऊंचाई वाले इस शिव मंदिर के गुंबद की ऊंचाई 111 फीट होने के कारण ये एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर बन गया है। इस मंदिर के शिखर पर स्थापित स्वर्ण कलश की लंबाई 11 फीट है। मंदिर का गर्भगृह: भक्तों जटोली शिव मंदिर के गर्भगृह में स्फटिक मणि निर्मित बहुत ही भव्य और दिव्य शिवलिंग के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्तियाँ प्रतिष्ठित हैं। मंदिर के प्रबंधन कमेटी के सदस्यों द्वारा बताया जाता है कि जटोली शिव मंदिर में प्रतिष्ठित शिवलिंग के निर्माण में उस समय लगभग 17 लाख रुपये खर्च हुये थे। मंदिर परिसर: भक्तों जटोली शिव मंदिर परिसर में शिव- पार्वती के अलावा गणेशजी, कार्तिकेय जी और हनुमान जी की मूर्तियां प्रतिष्ठित की गयी हैं। इस शिव मंदिर के कोने में एक प्राकृतिक शिव गुफा है। जिसे स्वामी कृष्णानंद गुफा के नाम से जाना जाता है। इस गुफा के दर्शन के लिए आज भी भक्तों की अच्छी ख़ासी भीड़ उमड़ती हैं। मंदिर परिसर में दाईं ओर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है। इसके 200 मीटर की दूरी पर शिवलिंग भी है। स्वामी कृष्णानंद की तपस्या का फल: भक्तों जटोली शिव मंदिर का निर्माण स्वामी कृष्णानंद परमहंस के चमत्कार से भी जुड़ा हुआ है। भगवान शिव के परम भक्त स्वामी कृष्णानंद परमहंस जी ने जटोली में भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। तब यहां पानी की बहुत अधिक समस्या थी। स्वामी कृष्णानंद परमहंस जी के तप से प्रसन्न होकर शिवजी ने अपने त्रिशूल से ज़मीन पर प्रहार किया जिससे जमीन में से पानी निकलने लगा। तब से लेकर आज तक जटोली में पानी की समस्या नहीं आई है। मान्यता है कि इस जल में कई रोगों को ठीक करने वाले गुण हैं। भक्तों के दान से बना मंदिर: भक्तों जटोली शिव मंदिर के निर्माण में करोड़ों की धन राशि खर्च हुई है। ये समस्त धन राशि स्वामी कृष्णानंद परमहंस महाराज के शिष्यों और भक्तों के दान द्वारा संग्रह की गयी थी। मंदिर का बढ़ता महत्व: भक्तों यात्रियों और पर्यटकों की दृष्टि से भी जटोली शिव मंदिर का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है हर साल देश और दुनिया के लाखों यात्री और सैलानी दर्शन के लिए इस मंदिर का रुख करते हैं। मंदिर में भंडारा: भक्तों जटोली मंदिर प्रबंधन कमेटी की ओर से हर इतवार को भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा जिन भक्तों की मन्नत पूर्ण हो जाती है वो इस मंदिर के प्रति अपनी आस्था और श्रद्धा प्रकट करते हुये मंदिर में भंडारे का आयोजन करवाते हैं। कहा जाता है कि जटोली शिव मंदिर में स्फटिक यानि पारद शिवलिंग विराजमान हैं। शिवपुराण में पारद के शिवलिंग को अत्यंत चमत्कारिक बताया गया है। इसलिए जटोली शिव मंदिर में सभी भक्तों की मन्नतें पूर्ण होती है। मंदिर के पत्थरों से आती है डमरू की आवाज: भक्तों स्थानीय भक्तों के अनुसार- जटोली में भगवान शिव का नित्य निवास है। भक्तों के अनुसार आज भी जटोली शिव मंदिर के पत्थरों से डमरू की आवाज आती है। इसलिए प्रायः भक्तों को यहाँ भगवान शिव के मौजूद होने की भी अनुभूति होती है। अन्य दर्शनीय स्थल: भक्तों अगर आप जटोली शिव मंदिर की यात्रा कर रहे हैं और आप सैर सपाटे में भी रुचि रखते हैं तो आप कसौली, शूलिनी मंदिर, कुथार का किला, सिरमौर, बरोग, जवाहर पार्क, नालगढ़ किला, दरलाघाट और मजथल अभयारण्य जैसे स्थानो के पर्यटन का आनंद उठा सकते हैं। भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन ! ???? इस कार्यक्रम के प्रत्येक एपिसोड में हम भक्तों को भारत के प्रसिद्ध एवं प्राचीन मंदिर, धाम या देवी-देवता के दर्शन तो करायेंगे ही, साथ ही उस मंदिर की महिमा उसके इतिहास और उसकी मान्यताओं से भी सन्मुख करायेंगे। तो देखना ना भूलें ज्ञान और भक्ति का अनोखा दिव्य दर्शन। ???? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. #devotional #hinduism #devotional #jatolishivtemple #shiv

Latest Videos

Partner Program Latest Videos Terms of Service About Us Copyright Cookie Privacy Contact